हौसले की उड़ान
हर मोड़ पे तूफ़ान मिला, हर राह में कांटे थे,
पर तू चली यूँ मुस्कुराकर, जैसे कदमों में सब फूल बांटे थे।
गिरकर भी संभली, हर दर्द को सहा,
आँखों में जो सपना था, उसे पूरा करने को यहाँ।
धूप में भी छाँव थी तेरी हिम्मत की,
हर अंधेरे को उजागर करती थी जज़्बात की रोशनी तेरी।
जो रोके तुझे, तू वही तोड़ आई,
हर मुश्किल से जीतकर, राह मोड़ लाई।
कोई कहे पागल, कोई कहे ज़िद्दी,
पर तूने तो अपनी कहानी खुद लिख दी।
आज जो तू खड़ी है, सिर उठाकर,
वो तेरा ही विश्वास है रब पर।
आंधियाँ आएँगी, फिर भी तू चमकेगी,
तेरी जंग की कहानी से, दुनिया भी कुछ सीखेगी!