बिछड़ने की सज़ा
तेरी यादों का मौसम आज भी वही है,
बादलों के संग दिल की तन्हाई भी वही है।
चाहकर भी तुझे भुला नहीं पाया,
इस दिल की नादानी आज भी वही है।।
राहों में चलूं तो साया भी रूठ जाता है,
तेरी आहट का इंतज़ार हर गली में करवाता है।
बिछड़ना था तो किसी और मोड़ पर जाते,
दिल के सबसे करीब आकर क्यों रुलाते?
तू भी शायद मुझे भुला चुका होगा,
या फिर किसी और के संग हंसा होगा।
पर मेरी मोहब्बत को इतनी जल्दी मत तोल,
ये वो दर्द है जो सदा संग रहेगा अनमोल।।