माँ का प्रेम
माँ का प्रेम वो सुबह की पहली किरण है,
जो अंधेरों को पीछे छोड़ देती है।
यह वो चुप्पी है, जो सब कह जाती है,
और वो कहानी है, जो कभी खत्म नहीं होती।
माँ का प्रेम नदी की धार सा है,
जो हर रुकावट को पार कर जाता है।
कभी मीठा सा संगीत बनता है,
कभी थपकियों में आराम बन जाता है।
यह प्रेम बिना आवाज़ का गीत है,
जो हर दिल के तार छू जाता है।
जैसे रात को चाँदनी का सहारा,
वैसे ही जीवन को माँ का किनारा।
माँ का प्रेम वो अदृश्य छाया है,
जो हर मुश्किल में साथ खड़ी रहती है।
धूप कितनी भी तेज़ हो जाए,
उसकी ममता की छत तले सुकून मिलता है।
यह वो दीप है, जो खुद जलता है,
ताकि हमारे जीवन में रोशनी रहे।
यह वो सपना है, जो हर माँ देखती है,
कि उसकी औलाद हमेशा हँसती रहे।
माँ का प्रेम कभी लिखा नहीं जा सकता,
यह तो बस महसूस किया जा सकता है।
दुनिया के हर कोने में खोज लो,
इससे बड़ा कोई चमत्कार नहीं।