माँ का प्यार
माँ का प्यार वो बीज है,
जो धरती के नीचे भी सांस लेता है।
कोई देख नहीं पाता उसे,
पर वही एक दिन जंगल बन जाता है।
माँ का प्यार वो खामोश दुआ है,
जो हर राह में साथ चलता है।
हम गिरें तो दर्द हमें होता है,
पर उसकी आँखें रातभर भीगती हैं।
यह वो धागा है जो टूटा नहीं,
चाहे समय कितनी भी गांठें बाँध दे।
यह वो रोशनी है जो बुझती नहीं,
चाहे अंधकार कितना भी गहरा हो।
माँ का प्यार शब्दों में नहीं रहता,
यह हाथ की थपकी में मिलता है।
रात की ठंडी चादर में छुपा होता है,
या दो रोटियों के बीच मुस्कुराता है।
कभी खुद भूखी रहकर खिलाना,
तो कभी दर्द छुपाकर हँसाना।
उसका प्यार न मोल का है,
न इसका कोई तोल है।
माँ का प्यार वो घड़ी है,
जो समय से परे चलती है।
हम उसके लिए हमेशा बच्चे रहते हैं,
चाहे हमारी उम्र जितनी भी बढ़ती है।
दुनिया में हर रिश्ता मिट सकता है,
पर माँ का प्यार अमर रहता है।
यह वो कहानी है जो अनकही है,
और यह वो कविता है जो कभी खत्म नहीं होती।