प्रकृति का आलिंगन
हरी चूनर ओढ़े ये धरती मुस्कुराती,
नीले अम्बर में बादलों की लहराती छाती।
सूरज की किरणें जैसे सोने की छुअन,
हर कण में रचती हैं नवजीवन का चुंबन।
पर्वतों की गोद में बहती नदियों का राग,
जंगलों में गूंजता कोयल का मधुर फाग।
फूलों की मुस्कान, भंवरों की बात,
ये प्रकृति है, प्रेम का एक अनमोल साथ।
शांत झील में झांकती चाँद की सूरत,
जैसे सृष्टि लिख रही हो कोई नई खूबसूरत।
पवन का गान, वर्षा का स्पर्श,
हर घटा में छिपा है जीवन का हर्ष।
कभी तूफ़ान, कभी शीतल बयार,
प्रकृति है जीवन का सजीव आधार।
इसका हर स्वर, इसका हर रंग,
सिखाता है हमें, जीने का नया ढंग।
आओ, इसके आँचल में फिर से सिमट जाएं,
इसकी लय में अपनी सांसें मिलाएं।
नहीं चाहिए और कोई प्रेरणा,