दर्द
दर्द की कोई परिभाषा नहीं होती,
यह तो बस महसूस करने की बात होती।
कभी आंसुओं में बह जाता है,
कभी मुस्कान में छिप जाता है।
कभी किसी अपने का छोड़ जाना,
कभी खामोशी में टूट जाना।
कभी शब्दों की चोट लगती है,
कभी ख्वाबों की मौत लगती है।
दर्द के चेहरे अनगिनत होते हैं,
हर किसी के दिल में अलग होते हैं।
कोई सहते-सहते मुस्कुराता है,
कोई गहरे सन्नाटे में खो जाता है।
पर दर्द सिखाता है जीना,
हर घाव को समय से भर लेना।
यह खुद से मिलवाता है,
हमें और मजबूत बनाता है।
तो दर्द से डरो मत,
इसे अपना साथी समझो।
यह तुम्हारे भीतर की ताकत है,
जो अंधेरों में भी रौशनी भरती है।