दुख
छुपा हुआ है दिल के कोने में,
एक दर्द जो कह नहीं पाते।
हर आहट पे टूटते सपने,
जिन्हें हम फिर से बुन नहीं पाते।
आंसुओं की चुप नदी में,
बहता है दिल का सूनापन।
हर कदम पे छूटती छाया,
जैसे खो रहा हो अपनापन।
चमकते सूरज की किरणें भी,
अब धुंधला-सा असर लाती हैं।
मन की दीवारों पर यादें,
जख्मों के निशान बनाती हैं।
पर शायद इस दुख की गहराई,
एक नई राह दिखाएगी।
अंधेरों के उस पार कहीं,
रोशनी फिर से मुस्कुराएगी।