सादर वन्दन सहित मंच में सभी को आदर सहित समर्पित कृपया लघु रचना आकलन, समालोचना अपेक्षित है --
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ग़ज़लः
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आरज़ू थी खामोश
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जुबाह खामोश थी घड़कनों में शरारात की,
जालिम हुस्ने आरज़ू थी मिरे शिकायात की।
गुलो की ज़बाँ थी बाजोर, दिलों की सदा,
फना पर बयाँ कर रही थी हिकायत की।
बेदाद गर सियाहत के पर्दे थे लम्हों पे तन,
चश्म ए रवायत हुई राहत तिजाहरात की।
तवील आसमाँ को ऐस बेजा सिफ़ारिश मिली,
खताये बिछड़ती हुई थी बरहम इनायात की।
हवा चुप थी, दस्तक रुकी सी पुर नम लगी,
मिरी चुप इस दफा अजब हया मलामात की।
लहू से जो सानी रह तहरीर शब-भर लिखी,
शहादत अश्को बनी फिर बात अदावत की।
सफ़ीना था गर्दिश में हम नशी बरसों तलक,
अहसास तकाजा दास्ताँ थी खिदामात की।
तसव्वुर में जलता रहा रौशनी सफैईयात की,
जमुरियत से बिछी थी इमारात जहालात की।
बज्म ए सितारों की चादर लपेटे हुए वफात की,
ग़ुलामी में थी अफसरी खनक इस रियासत की।
ख़ुमार-ए-तमन्ना से बिछड़े हुए तबाहियात मिली,
तहयरत दोआलम कहाँ रह गई थी मोहब्बात की।
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प्रतिदिन आहार में संभव करे कि साबुत अनाज जिसमें जौ, ज्वार, मक्का, बाजरा, चना मूंग मोठ आदि स्थानीय बतौर उपज को अपने भोजन में रोटी दलिया और राब में स्थान देवें और उत्तम जीवन के साथ आदर्श, स्वस्थ्य और समग्र जीवन को अग्रसर सभी रहे यदि साद्र प्रार्थना-सविनय निवेदन है ।
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जुगल किशोर शर्मा, बीकानेर
मननं कुरु, चिन्तनं कुरु, कर्मभावं धारय the importance of reflection, contemplation, and maintaining the spirit of action (karma). - लोकः समस्ताः सुखिनो भवन्तु में समाहित सहज सनातन और समग्र समाज में आदरजोग सहित सप्रेम स्वरचित