Hindi Quote in Motivational by JUGAL KISHORE SHARMA

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दिल-ए-आबाद में हर सिम्त की वीरानी रही,
जर्रः ए हासिल ए आमद यु दूरियाँ हैरानी रही।
क्यूँ ख़ामोश रहूँ अब दर्द-ए-ज़मीर से,
दूर ए लम्हा या उलझन की रवानी रही।
बे पर्द अक्स हर एक ज़र्रे में देखा हमने,
नजदीक वो चाहत की ना फ़रमानी रही।
हिज्र की शब में बस इश्क़ की तन्हाई थी,
रहम दिल में इक वीरान-सी कुरबानी रही।
शोख़ीयॉं भी लुटी और वो हया भी न रही,
ख़्वाबों की नगरी में खुसूसी तरफदारी रही।
कोई कश्ती न मिली पार करने को हमें,
अब्र-ए-ग़म में सदा तेरी मेहरबानी रही।
रबजाने बहारें रुख़्सत हुईं अब चमन से मेरे,
जाने किस कूचे में गाहे बगाहे बेईमानी रही।
तुझसे नज़रें मिलाकर भी ठहरना मुमकिन,
उन हसीन लम्हों में हर बात आनाकानी रही।
रुख़ की शोख़ी से बेख़बर हो के कभी,
वो जो दरिया थी बस पानी-पानी रही।
गुज़री थी राह-ए-मुहब्बत से जब दिल की सदा,
हिजाब ए दरम्यां इक नयी कहानी वहानी रही।
वो सहमा सहर-ए-हस्ती में सब कुछ लुटा बैठा,
मगर वफ़ा में कहाँ वो हमे ही वो ईमानदारी रही।
हरचंद तिरे ना तूफाँ में कश्ती का किनारा मिला,
फानी याना मुझमें कहीं इक बुर्जुग अमलदारी रही।
मुहाल ए अरज परछाईयाँ भी मुझसे बेवफ़ा निकलीं,
दिल में हर तरफ़ इक परेशानी हवाए जुबानी रही।
खामोश रहा तेरा जल्वा भी कितना था बे-पर्दगी में,
गाफिल की मदहोशी ही तकवा ए जिल्लतेशानी रही।
बाद मुदद्त मेरी हस्ती का कोई ठिकाना न था,
आसंमा अजल हसाँस में बसी युही सुहानी रही।
ख्याल ए तौबा सदा हवाओं ने भी दस्तक नहीं दी,
रिंद ए दिल की दरवाज़े पे दरम्यान वीरानी रही।
अश्कों ने बहा दिया हर निशाँ मेरा,
चमन के याद में बस बे मक़ानी रही।
साकि ज़िंदा रहूँ या मैं रहूँ नहीं अब,
तेरी फ़ुर्कत में फिर भी जवानी रही।
हर ख़्वाब टूटा था तेरे ख़यालों से,
नज़र में बसी वो गमे हैरानी रही।
सफर-ए-इश्क़ में जब भी चला मैं कहीं,
तेरी यादों की ही ताज़ीरात बेगानी रही।
तुझसे मिलके भी गुलसिता, अंजुमन में अकेला,
जाने कैसी ये परेशाई या मुलजिमानी रही।
दर्द की आवाज़ में सदा गूँजती,
तेरी ख़ामोशी की शरिफानी रही।
शाम का उजाला भी ठहरने से डरे,
ग़ुरबत की हवा में यही वीरानी रही।
मुड़ के देखा था जब वो मुझे जुदा को,
हर तरफ़ इक अश्क की निशानी रही।
दिल की वीरानी में आ कर भी न जाना,
तेरी वफ़ा की फ़ानी सी कीमतानी रही।
उकाई की रहमतों का मंज़र देख,
दिल में वही बेपनाह हैरानी रही।
सहर-ए-बेख़ुदी में खो कर भी,
तूफ़ानों की कोई ज़िंदगानी रही।
दरिया ए आलमी मसर्रत थी फिर से,
तेरी निगाहों में मस्ती ए निशानी रही।
यूँ ही अश्कों की रवानियों में क्यु बहता,
दिल की हर चाहत में बेइन्ताजामी रही।
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सिम्त: दिशा, ओर, तरफ़.
दिल-ए-आबाद – आबाद दिल, या सजीव, हर्षित ह्रदय
जर्रः – चोट, घाव
दरम्यान – बीच में
हिज्र – वियोग या बिछड़ना
शब – रात
रहम – करुणा या दया
शोख़ीयॉं – चंचलता या लुभावनी अदाएं
अब्र – बादल
ग़म – दुःख या पीड़ा
कूचा – गली या रास्ता
हसीन – सुंदर
शोख़ी – चंचलता
तौबा – पश्चाताप
रिंद – मस्त या लापरवाह
साक़ी – शराब परोसने वाला
सफर – यात्रा
गुलसिताँ – बाग़, फूलों का बगीचा
अंजुमन – सभा, समाज
मुलजिमानी – दोष, आरोप
सहर – सुबह
ग़ुरबत – निर्धनता या दूरी
उकाई – थकावट
सहर-ए-बेख़ुदी – आत्मविस्मरण की स्थिति
दरिया – नदी
मसर्रत – ख़ुशी
रवानियों – बहाव, प्रवाह
शब्द काव्य में गहराई और सूक्ष्मता लाने में मदद करते हैं, जिससे भावनाओं और हालातों की प्रभावी अभिव्यक्ति होती है।
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जुगल किशोर शर्मा, बीकानेर
दीपावली के शुभ अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं कृपया मनन करें चिंतन करें और कर्म का भाव रखें - लोकः समस्ताः सुखिनो भवन्तु में समाहित सहज सनातन और समग्र समाज में आदरजोग सहित सप्रेम स्वरचित - आदर सहित परिचय मैं जुगल किशोर शर्मा, बीकानेर में रहता हूॅं लेखन का शौक है मुझे स्वास्थ्य,सामाजिक समरसता एंव सनातन उद्घट सात्विकता से वैचारिकी प्रकट से लगाव है, नियमित रूप से लिंक्डिंन,युटूयूब,मातृभारती, अमर उजाला में मेरे अल्फाज सहित विभिन्न डिजीटल मीडिया में जुगल किशोर शर्मा के नाम से लेखन कार्य प्रकाशित होकर निशुल्क उपलब्ध है समय निकाल कर पढें

Hindi Motivational by JUGAL KISHORE SHARMA : 111956044
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