कल एक महफ़िल सजी थी
बहोत बाते हुई
दोस्ती , रिश्ते , पैसा , बच्चे , पढ़ाई
फिर बारी आई
“मोहब्बत” की
अब जब बाते मोहब्बत की हुई
तो बेशक याद उसकी आनी ही थी
अब मसला ये हुआ कि उस महफ़िल में हाज़िर भी रहना था
और आँखो में उतर आई उस मोहब्बत को छुपाना भी था ❣️💕