भरी महफिल से आवाज आई.........
है खुदा तू ने ये कैसे जिंदगी बनाई
दुख से भरी राहें दिखाई
तकलीफों से राहें सजाई
मैं चलता गया उस राह पर
और तू ने मंजिल भी न लाई
खुदा
मैंने ये सब सोचके ही बनाया
दुख से ही तू ने हौंसला पाया
तकलीफों से ही तुझे लड़ना आया
ये राह उतना नहीं था मुश्किल जितना तू ने बनाया.....
आगे चल के तो जा तू ने खुद को मंजिल के लिए तैयार पाया
इसलिए मैंने ये बनाया