तूने बन के हैवान, इंसानियत को रौंद डाला,
उसकी मासूमियत को लहूलुहान कर डाला।
क्यों किया तूने ऐसा घिनौना काम,
जिस्म को नोचकर किया क्यों इंसानियत का अपमान।
वो चीखती रही, पर तुझे जरा भी दया न आई,
उसकी आंखों में छुपे दर्द की आवाज न आई ।
क्या उसके आँसुओं का कोई मोल नहीं,
सच कहूं, तेरे जैसे दरिंदों को इंसान कहने का कोई हक नहीं।
तूने छीन ली उसकी वो प्यारी सी मुस्कान,
बता जरा, अब कहां से लाएगी वो नई पहचान।
अब तेरा हिसाब होगा, चींखे तो तेरी अब रुकेंगी नहीं ,
वो हर दर्द का इंसाफ होगा, इंसानियत अब सोएगी नहीं।
तू अब छुप चांहे कितनी भी गहराई में,
न्याय की ज्वाला जला देगी तुझे उसी नरक की खाई में।
हर आंसू का हिसाब लिया जाएगा,
तेरे काले कर्मों का हिसाब अब जरूर पूरा किया जाएगा।
✍️Jeetu Sharma