तुम बारिश सी लगती हो,
पतझड़ में जैसे पहली बूँद,
सूखे पत्तों पर गिर कर,
फिर से जीवन की आशा जगाती हो।
जैसे सूखी धरती पर,
पहली बारिश की सौंधी खुशबू,
वैसे ही तुम्हारा स्पर्श,
मेरे दिल की हर तन्हाई को मिटा देता है।
फूलों पर गिरती बूँदों की तरह,
तुम्हारी हंसी खिलखिलाती है,
हर बूँद में एक नयी रौशनी,
जो जिन्दगी को रोशन कर जाती है ।
जैसे गरमियों में ठंडी हवा का झोंका,
तुम्हारे शब्द मेरे दिल को छूते हैं,
तुम्हारी मधुर आवाज़ बारिश सी
मेरे अंदर के सारे दुखों को धो जाती है।
जब तुम पास होती हो,
जैसे सावन की पहली फुहार,
मेरे दिल की सूखी नदी में,
फिर से बाढ़ ला देती हो।
तुम्हारे बिना मैं सूखा पेड़ सा,
और तुम हो वो बारिश,
जो मेरी रूह को फिर से हरा-भरा कर देती है,
हर बूंद तुम्हारी, मेरे जीवन में नया रंग भर जाती है।
तुम बारिश सी लगती हो,
जो हर बार, फिर से मुझे नया बनाती हो,
मेरे जीवन में रंग भरती हो,
और हर ग़म को, हर दर्द को धो जाती हो।