शमा है,शाम की तन्हाई अफ़साना याद है,
लबो पे आती है सदा वो बहाना याद है।
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जलसे में कंदाअब भी है तेरी खुशबू बसी,
वो पहली मुलाक़ात और घबराना याद है।
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बजा-ए-राह-उलफत साथ चलना याद है,
हसरतों में लुफत छोड़ के बताना याद है।
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गुलों की खुशबुओं में तेरा बसेरा है अब भी,
जुगूनूओं रांता जागना ओ मुस्कुराना याद है।
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सराब-ए-आगाज ख़त नवाजी भीनी सी रंगत
हर्फ़ में असहार सब्ज भरा गुनगुनाना याद है।
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खयाल-ए-जिकर और राह में अकेले चलने को,
गुलसन-ए-वफा में आँखों का भर आना याद है।
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फराग़ात दीन दुनिया गर उदासी बन गई,
वो बहाने वो दिखाना रुलके हंसना याद है।
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जबहें बहार-ए-गम या दोस्ती के प्यारे लम्हे,
धीमी वो बारिस या छतो का टपकना याद है।
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सोहबत-ए-महफ़िल रोषन तो हम्मा अब भी,
शिकायत नज़र और शिकावा घुमाना याद है।
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जज्बात ए खामोस और सब-ए- तन्हाइयों
राज़-ए-दिल ख्याल ए यार समझाना याद है।
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जिक्र-ए-खतरात या चाँद को आसमान में,
निगाहें उजाला सोहबत इराद-तना याद है।
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कुछ तो था बात में जो दिल को छू गया,
हंसी तेरा, वो नरमी से अजीजाना याद है।
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दर-ए-साह-ए-सावन सबा की बूंदें तेरी,
उजाले बिखरना सरब-ए-जमाना याद है।
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सप्रेम-स्वरचित मनोरजंन मनोरथपूर्ण भाव सहितकेवल चितंन योग्य, मय आंनन्द,अकथ बस, नेपथ्य में बहुत कुछ सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक परिदृश्य के मांनिद ,
© जुगल किशोर शर्मा-बीकानेर-9414416705