ब्वजा ए बिस्मिल दिल में, तो इज़हार संभला मेरे बाद,
वो आए ना आए ज़िंदगी में, जताये राज़ बदला मेरे बाद।
जहर ए तष्नागी बस तो दोनो के लिए काफ़ी हो जाए,
दिल के ज़ख्मों को भरने का सामान कन्नाजा मेरे बाद।
जहर-ए-आवारगी में जगह ना हो किसी के लिए शायद,
तो रहबर जिन्दगी फ़ेहमी में कभी ना रखना गांजा मेरे बाद।
वाकेह इज्जत की हिफाजत और सच्चाई का रास्ता बता,
तब सुकून ए रूह मालूम को कभी न दो सजा मेरे बाद।
सुकून-ए-फ़िकर किसी को बे-असर उम्मीद में जीने दो,
दफतन या दिलको झूठी तसल्ली से निहारि तजा मेरे बाद।
सुकून-ए-ख्यायाला है कोई, सच्चाई को पसंद करता है,
जहर-ए-मुसाफिर दामन में नहीं रखता जफा मेरे बाद।
बाज-ए-अजमत तो है, इज़हार से गुमान दूर होता है,
ना बेसबरी ए दिल, मनाया है रफता रफता मेरे बाद।
गर झूठ के साये में जीना, बन्दे सुन कोई फ़ायदा नहीं,
बाजा-ए-राह-ए-उल्फ़त ही असल बरस्ता मेरे बाद।
जहर-ए-अमान है, तो इज़हार करने से घबराना कैसा,
इल्जाम जज़्बात इज़हार है बस जश्न-ए-फजां मेरे बाद।
जहर-ए-सितमगर नफ़रत है, तो उसका भी इज़हार करो,
बेकरारी-ए-हयात मुसल्लसल्ल यूही बोझ उतरा मेरे बाद।
साराब-ए-फलक उम्मीद न पाले, ये काम की यु ही करा
कलम फ़ैश करने से ही ज़िंदगी होती है आ-सना मेरे बाद।
सराब-ए-मिरजा बचाके तोहफा दो, झूठी तसल्ली न दो,
ना हर गम को दूर करो, और ये रही खुशियाँ खता मेरे बाद।
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सप्रेम-स्वरचित मनोरजंन मनोरथपूर्ण भाव सहित
केवल चितंन योग्य, मय आंनन्द,अकथ बस, नेपथ्य में बहुत कुछ सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक परिदृश्य के मांनिद ,
© जुगल किशोर शर्मा-बीकानेर-9414416705