Hindi Quote in Story by Sudhir Srivastava

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लघुकथा
रक्तदान जिम्मेदारी
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इंटरव्यू के लिए जाते समय रास्ते में एक वृद्धा को घायल हालत में देख राकेश ने गाड़ी रोककर अपने दोस्त को फ़ोन किया हालांकि वहाँ बहुत भीड़ थी लेकिन सभी तमाशबीन बने हुए थे उन्हें विडियो बनाने से ही फुर्सत नहीं मिल रही थी।
संयोग से उसके एक मित्र करने का घर पास ही था, उसने फोन कर उसे तुरंत बुलाया। करन भी बिना देरी किए पहुंच गया।
दोनों मिलकर उस वृद्धा को अस्पताल ले गए। जहां डाक्टरों ने उसे बताया कि यदि इन्हें समय पर रक्त मिल जाए तो ही हम कुछ कर सकते हैं।
राकेश और करण ने आपस में विचार किया और दोनों ने रक्तदान कर वृद्धा की जान बचाई।
वैसे तो विलंब हो चुका था, फिर भी करण ने राकेश को तुरंत इंटरव्यू के लिए भेजा। और खुद वृद्धा की देखभाल के लिए रुक गया।
राकेश जब इंटरव्यू के लिए पहुंचा, तो इंटरव्यू खत्म हो चुका था। इंटरव्यू लेने वाले कमरे से निकल ही रहे थे।
राकेश ने देर से आने का कारण बताया। उसके कपड़ों पर लगे खून के धब्बे यह बताने के लिए काफी थे कि वो सच बोल रहा है।
वहीं खड़े खड़े एक वरिष्ठ सदस्य ने पूछा कि तुम्हें इंटरव्यू से ज्यादा उस बुढ़िया की चिंता क्यों थी? तुम्हारे अलावा भी तो लोग वहां थे।
राकेश ने शालीनता से जवाब दिया - थे, लेकिन सब तमाशबीन। मेरे लिए इंटरव्यू से ज्यादा महत्वपूर्ण किसी की जान बचाना लगा। शायद ईश्वर की भी यही इच्छा थी। तभी तो ये प्रेरणा हमें और हमारे मित्र को मिली और हम दोनों ने न केवल अपने कर्तव्य निभाये, बल्कि रक्तदान कर अपनी जिम्मेदारी का भी निर्वाह किया।
एक अन्य सदस्य ने कहा - फिर तो आप समाज सेवा कीजिए। नौकरी की आपको जरूरत ही क्या है?
जीवन यापन के लिए नौकरी की जरूरत तो है ही, लेकिन किसी की जान बचाने का सौभाग्य कम ही लोगों को ही मिलता है।- राकेश ने सहजता से जवाब दिया। नौकरी तो फिर भी मिल सकती है लेकिन किसी का जीवन मौत के बाद वापस नहीं मिल सकता सर। ये नौकरी नहीं भी मिलेगी तो भी मुझे अफसोस नहीं होगा।
एक अन्य सदस्य ने उससे पूछा- फिर इंटरव्यू के लिए आने का मतलब क्या था?
राकेश ने कहा - यह तो मेरा कर्म है। जिसके साथ मेरी और मेरे परिवार की उम्मीदें जुड़ी हैं।
सभी सदस्यों ने राकेश की तारीफ करते हुए कहा - मि. राकेश! आपका इंटरव्यू हो चुका है। हम सभी की ओर से आपको शुभकामनाएं।
राकेश ने सभी को प्रणाम किया और वापस हो गया।

सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा उत्तर प्रदेश

Hindi Story by Sudhir Srivastava : 111938274
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