घर से निकलते ही.....♥️🖋️
घर से निकलते ही.....
कुछ दूर चलते ही.....
जाने कहाँ जाना था....
पता ही नथा चला....
निकले तो यूँ अकेले थे...
इन अंजाने नए रास्तों पे.....
यहां हम भटकते चले गए....
हर मोड़ पे लोग मिलते चले गए....
कहानियाँ जुड़ती चली गईं....
ये मुसाफिरोंका कारवाँ बनता चला गया.....
राहों की चुनौतियों से....
हम संभलते चले गए..
हर कदम पर नए सपने....
दिल में पलते चले गए....
ख्वाबों की एक चादर सी.....
आँखों में हम बुनते चले गए..
मंज़िल की तलाश में...
हम खुद को ही ढूँढते चले गए......
हर मोड़ पर एक नजारा....
नई उम्मीद दिल में जगाता चला गया..
जिंदगी की इस राह पर.....
हम मुस्कराते चले गए.....
अपने आप को हर मोड़ पर....
निखारते चले गए.....
और ये कारवा यूहीं......
बढ़ता चला गया......
और ये कारवा यूहीं......
बढ़ता चला गया......
धन्यवाद 🙏🏻💫
-संकेत गावंडे.