#coffee
मैं और मेरे अह्सास
मन परिंदा उड़कर जा पहुँचा साजन के पास l
लम्हा दो लम्हा जी हल्का करने बैठे साथ ll
बाद मुद्दतों के मुलाकात का पैगाम आया है l
कल फ़िर मिले ना मिले एसी सुहानी रात ll
दिल चटपटा रहा कुछ हुस्न को भेजने को l
महकिले लिफ़ाफ़े में आज भेज दी है याद ll
बड़ा बैचेन और उखड़ा सा रहेता है दिल l
अरसा हुआ कॉफ़ी पीते नहीं हुईं हैं बात ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह