#Marathon
मैं और मेरे अह्सास
लम्हों में ज़िंन्दगी को जी लो l
यार के साथ का जाम पी लो l
जुदाई के पलों की कापकुप l
मुहब्बत के धागों से सी लो ll
जो भी है बस यहीं एक पल हैं l
नशीली शाम का लुफ्त भी लो ll
जिंदगी रेस का घोड़ा बनी हुई है l
जो भी मिले आज अभी लो ll
कल शायद देनेवाला ना हो l
जीतना जी चाहें वे सभी लो ll
९-६-२०२४
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह