बच्चे भी कमाल कर देते हैं,
मस्ती में 'कुत्ते' को हेलो देते हैं।
राजनीति की दुनिया भी अजब खेल दिखाती है,
जात-पात और वर्ग की लकीरें खींच जाती है।
नेता जी बड़े-बड़े वादे करते हैं,
अच्छे दिन लाने का दावा करते हैं।
पर चुनाव जीतने के बाद,
जनता की समस्याएं भूल जाते हैं।
संसद में बैठकर, बहसों में उलझते हैं,
धरातल की सच्चाई से दूर रहते हैं।
जाति और धर्म की राजनीति चलाते हैं,
अपने वोट बैंक को पक्का बनाते हैं।
गरीब की थाली से खाना छीन लेते हैं,
अमीरों के खजाने को और भर देते हैं।
विकास के नाम पर, झूठी तस्वीर दिखाते हैं,
वास्तविकता में, गरीब को और गरीब बनाते हैं।
अफसरशाही और भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हैं,
सच्चाई से आंखें मूंद लेते हैं।
आम आदमी की आवाज को दबा देते हैं,
सत्ता के नशे में, सब कुछ भुला देते हैं।
जात-पात की राजनीति से देश को बांटते हैं,
भाईचारे की भावना को ठेस पहुंचाते हैं।
क्लास और कास्ट की खाई को और गहरा करते हैं,
एकता की जड़ों को कमजोर करते हैं।
बच्चे भी कमाल कर देते हैं,
मस्ती में 'कुत्ते' को हेलो देते हैं।
पर राजनीति के 'बड़े बच्चे' जब खेलते हैं,
तो देश की तकदीर को खेल बना देते हैं।
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