शहर की तका़वत हरारा शहादत से है,
क़िस्सा ई फ़ना का, ये दावा फरेबन में है
लफ्जों में जहर है, शौक़ीनिया हमदर्द से है
मरहम सहम गया ज़खम, जहर कुव्वत में है
हर नज़र में है डर, हर दिल हिजरत से है
इंसानियत यु सिलसिला दे नसीहत में है
बच्चों के चेहरे पर मुस्कान है खसुसन से है
भूख ए आवाज फ़रियाद-ए-बे-आवाज़ में है
रक्स ए तमाशा नफसा सलिके इज्जत सें है
फ़िक्र-ए-हुनर समझ लें फरेब पसमंजर में है
ये दुनिया है बाज़ार-ए-हाहाकर आफियत से है
ये जहां है तमाशागर-ए-बे-दर्द फसाहत में है
तुम हो रूह-ए-बेबस, तुम हो तमाम निगाहन से है
तुम उम्मीद ए किरण, दर्द ए दवा क्यु कुदरत में है
दुनिया की भीड़ से तुम अलग सदाफत से है
नसब अहसां खोकर जिन्दगी दीने जदोजद में है
© जुगल किशोर शर्मा बीकानेर
ताक़वत - ताकत
हरारा - गर्मजोशी
शहादत - शहादत
किस्सा - कहानी
फ़ना - नाश
दावा - दावा
फरेबन - धोखा
लफ़्ज़ों - शब्द
ज़हर - ज़हर
शौक़ीनिया - शौक
हमदर्द - सहानुभूति
मरहम - मरहम
सहम - डर
ज़ख्म - घाव
कुव्वत- ताकत
नज़र - दृष्टि
डर - डर
हिजरत - विस्थापन
इंसानियत - मानवता
सिलसिला - क्रम
नसीहत - उपदेश
मुस्कान - मुस्कान
ख़ासुसन - विशेष
भूख - भूख
आवाज़ - आवाज़
फ़रियाद - पुकार
बे-आवाज़ - बिना आवाज़ के
रक्स - नाच
तमाशा - तमाशा
नफ़्सा - आत्मा
सलिके - ढंग
इज़्ज़त - इज्ज़त
फ़िक्र - चिंता
हुनर - कला
फरेब- धोखा
पसमंजर - पृष्ठभूमि
दुनिया - दुनिया
बाज़ार- बाज़ार
हाहाकार- चीख पुकार
आफ़ियत - आराम
जहां - संसार
तमाशागर - तमाशा देखने वाला
बे-दर्द - निर्दयी
फ़साहत - फुहड़ता
रूह - आत्मा
बेबस - असहाय
तमाम - सभी
निगाहन - दृष्टि
उम्मीद - आशा
किरण - किरण
दर्द - दर्द
दवा - दवा
कुदरत - प्रकृति
दुनिया - दुनिया, संसार
सदाफ़त - सादगी
नसब - वंश
अहसान - अहसान
जिन्दगी - जिंदगी
जदो-जहद - संघर्ष