#Artist
मैं और मेरे अह्सास
मचलते हुए जज़्बात पढ़ सको तो पढ़ लो l
निगाहों में छिपी बात पढ़ सको तो पढ़ लो ll
मुहब्बत के नशे में डूबी हुईं बहकी महकी l
भीगती भिगोती रात पढ़ सको तो पढ़ लो ll
हर लम्हा नया रूप ओ नया अंदाज़ दिखाती l
जिंन्दगी के मामलात पढ़ सको तो पढ़ लो ll
आरज़ू और जुस्तजू बनी है जीने की चाह l
चित्रकार की क़ायनात पढ़ सको तो पढ़ लो ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह