#Anything
मैं और मेरे अह्सास
गाँव की मिट्टी की खुशबु खिंच लाई हैं l
अब जाके दिल ने राहत की साँस पाई हैं ll
हर तरफ़ हरियाली देख खो जाते हैं l
खेतों में सोने की फसलें लहराई हैं ll
ज़िंन्दगी हसतें मुस्कुराते पालती पलती l
सरसों धानी चुनरियाँ ओढ़ के आई हैं ll
परदेश में बासी खाते थे ख़ुद के घर में l
माँ के हाथ से पकी हुई रोटी खाई हैं ll
माँ के आँचल की छांव हैं ममता से भरी l
मुहब्बत से गाँव की गली गली सजाई हैं ll
२४-५-२४
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह