गुमशुदा हुई तन्हाई हो पर राज़दाँ इश्क़ की कमी भी हो,
तुम दूर हो चाँद जैसी पर शीतलता की एक नमी भी हो,
खुदा ए बे _ वफाइ की गवाही दे रहा वक़्त बे वक़्त रुखसत सा हो रहा है तु,
नूर ,चाँद, सूरत, गुलिस्ता सब सही था पर ये बेवफाई का किस्सा देखा नही था,
सुकूँ कैसे आये यार कापते कापते देख रहा हुँ, हश् कर सितम बर्बादी के जेल रहा हु ,
जबा मेरी लड़खड़ती रही लफ्ज सुखते रहे वो कैसी है जानने को उसने नजर फेर ली हमे देखकर,
धूप भी थर्थराते हुए बदन को भीगो गया, पलकों को सुखा बंजर बना दिया जुल्म दे दे कर,
अब चाँद सितारे से क्या पूछते हो मेरे हालत के बारे मे, हारे है तो हारे है हम इश्क़ मे अब पता क्यों पूछना।
DEAR ZINDAGI 🙏