અજાણ્યો પત્ર - 07
मेरे जीवन की तुम अंतिम खुशियां थी। अब मेरा जीवन पीड़ाओं से भर जाएगा, खाली कमरों में अकेलापन गिड़गिड़ाएगा ! चिल्लाएगा ! जाने की जिद करेगा! लेकिन मैं उसे आजाद नहीं होने दूंगा! क्योंकि वो तुमने मुझे उपहार में दिया है। जिसका मोल में कभी नहीं चुका सकता। इस बेशकीमती उपहार के लिए तुम्हारा शुक्रिया।