અજાણ્યો પત્ર - 06
तुम्हे तितलियां बहोत पसंद है ना! देखो मैं तुम्हारे लिए कितनी सारी तितलियां लेकर आया हूं , बिलकुल तुम्हारी तरह है! नाचती गाती, सुंदर मनमोहक, एक फूल से दूसरे फूल पर मंडराती, कांटो में घिरे फूलो को चूमती हुई, सबको मंत्रमुग्ध करती वो भी कहीं दूर आसमान में उड़ गई! और छोड़ गई तो सिर्फ कांटे, दर्दभरे कांटे!