कभी कभी मैं सोचता हूँ कितनी आसानी से कह दिया जाता है कि मुझे माफ़ कर दो...
समझ नही आता कि माफी किस चीज़ की ?
अपने वादों से मुकरने की ?
कभी न खत्म होने वाली अज़ीयत की ?
रातों के जागने की ?
ज़माने भर के सामने तमाशा बनाने की ?
झूटी मोहब्बत की या फिर बे वजह छोड़ जाने की.?