अब नाउम्मीदी इतनी चरम पर है कि मन रोने लगता है, जैसे मैं अरसे से भटका हुआ हूं और किसी ने मुझे कभी खोजा ही नहीं, मैं किसी को नहीं मिल पाया फिर भी जब भी कोई मुझ तक पहुंचा तो लगा इसे थामे रखूं सदा के लिए पर मैं अपने अभिशप्त भाग्य द्वारा हर बार ठगा जाता आया हूं...!!!