मैं पहले सोचता था कि गर मैं मर गया तो कौन होगा मेरे लिए रोने को,कौन होगा जिसको मेरे ना होने से दुःख होगा,जिसको मेरी कमी खलेगी पर वास्तविकता में मैं जीवन में कोई भी ऐसा अपना नहीं बना सका कि जिसके लिए मैं आवश्यक रहा हूं,जिसका भी रहा एक विकल्प, स्वार्थपूर्ति का साधन ही बना रहा...!!!