અજાણ્યો પત્ર - 04
मुझे प्रेम को अभिव्यक्त करना नही आया! मेरे होठों से नहीं निकले कोई शब्द; नहीं लिख सका तुम्हारे आंखो में छुपे हुए गहरे राज, नहीं ला पाया तुम्हारे लिए कोई चांद तारे! नहीं कह सका की तुम ईश्वर की सबसे खूबसूरत रचना हो। काश !मैं कुछ कह पाता, काश के तुम मेरे बिन कहे अल्फाजों को समझ जाती काश....