#Spring
बसंत की बेला आई साथ अपने मधुमास लाई l
पलाशों के आने की खुशी में मधुर रागिनी गाई ll
पीला प्रेम आसव छाया हुआ है फिझाओ में देखो l
सुसंगत मीठी गुँजती हवाकी प्यारी सौगातें पाई ll
वसु वसुधा पुलकित अंग अंग है नीखरा हरकही l
कोकिला के मधुर गान से प्रियतमा की याद सताई ll
टूटी है नीद वृक्षो की नई पत्तों के आगमन से l
खेत खलियानो में खिल खिल प्रतीक्षा उड़ाई ll
भँवरो के गीत रीझाए और पपीहे की गुंजन से तो l
कोयल के कंठ में आशा की किरणो ने आश दिल में जगाई ll
४-३-२०२४
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह