ख्वाहिश,
सुन ना तु क्यों ऐसा कर रहा है,
बोलते बोलते ही मेरे शब्द क्यों रुक जाते है,
तूने ही तो मेरी हर ख्वाहिश पूरी की थी,
फिर क्या वजह है जो तो तु चला गया ,
मुझे इस वीरान जहाँ मे अकेला छोड़कर,
तु मेरी हर ख्वाहिश, हर दर्द की दवा है फिर,
क्यों ऐसा कर रहा है,
सुन ना कोई नही है दूसरा मुझे सुनने वाला,
तुने ही तो पहना था मुझे लि बास की तरह,
उतारना चाह प्यार का लिबास ,
और उतरी मेरी खाल यार,
तु फिर से आकर देख ने मेरी आँखों मे,
वो ही पहली नज़र का नाजराना लिए,
अब वो प्यार नजर नही आयेगा, अब तो
आँखों मे ख्वाहिशो का नही रेत का दरिया है बहता,
तु इतना खामोस क्यों हुआ है एक वजह तो बता दे,
मन उदास, लब्ज छिलकर , युही अब हर रोज गुजरती हु, ख्वाहिशो वाले बाजार से।
कुछ अच्छा नही है यार जिंदगी मे,
एक तु क्या रूठा, मेरा तो पुरा का पुरा जग लूट गया,
आँखों मे छुपे उस प्यास को देख,
जो सिर्फ तेरी तलब लिये बैठा है।
यह जो मेरी आँखे तेरे इंतजार मे तड़प रही है,
कही बांध, झलक ना जाए, कही इसमें दरार न आ जाए,
कही यह टूट ना जाए और अगर ऐसा होता है,
और मे तुझे उस बहते हुए इश्क के पानी मे देखु,
तो सुन मै भी मर जाऊंगी,
फिर क्यों तु मेरे मरने की वजह बन रहा है।
कुछ तो वजह बता दे मुझसे दूर होने की,
यार कोई नही है साथी मेरा,
कुछ दोस्त है जीवन मे जो मुझे संभल रहे है।
तु लौटकर आ जा।
मेरी कोई तेरे से शिकायत नही।
आ जा तेरे इंतजार मे,
आँखे रेगिस्तान बन गई है।
अब ख्वाहिसे मार कर पनघट पर तेरा इंतजार कर रही हु,
आजा मेरे राही, आजा मेरे हम सफर।
भरत (राज) 💞