English Quote in Shayri by बिट्टू श्री दार्शनिक

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लाल नीली साड़ी में आ बैठी वो आईने के सामने,
भीगी जुल्फों को अपनी वो आहिस्ता से सुखा रही थी,
आइना भी देखता रह गया !

बिना किसी खयाल के चेहरे को लिए,
गले में जब लगा वो सुनहरा हार,
हाथो में अंगूठी प्यारी सी,
शीशे में चमकता सूरज अब,
चमक खोने लगा था।

लगी काजल जुकी पलकों पर,
एक मांग टीका छोटा सा,
चांद सूरज कौन देखे,
लिए हाथ में दो दीपक ...
कोई चांद खुद सूरज से बेहतर चमक रहा है।

सजी जब वो हल्की मुस्कान चेहरे पर,
नूर कोई अलबेला छलक गया,
आइना क्या, खूबसूरती क्या,
चमक क्या, दमक क्या,
उनकी नजरे भी वहां ठहर गई,
जिनकी कभी नजर नहीं थी।

खूबसूरती का केसे बखान करे,
शब्द अल्फाज़ लफ्ज़ कम पड़ जाए,
हाय ऐसा खूबसूरत नजारा भी ...
अब नजर को कहां नजर होता है।

- बिट्टू श्री दार्शनिक

#HappyDiwali
#HappyNewYear

English Shayri by बिट्टू श्री दार्शनिक : 111904840
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