कुछ किताब के पन्ने उलझा से गए हैं।
उलझन में सवरना भूल गए हैं।
कुछ तो बिखरे पड़े हैं तेरी यादों की तरह।
कुछ संभल ना छोड़ गए हैं।
जब सूरज चमकता है तो ।
तेरा चेहरा याद आता था।
रात तेरी बातों में कट जाती थी।
मंद मंद आती हवा तेरा एहसास लाती थी।
वह छत पर तारे गिनती हुई मैं।
तारों में तेरा चेहरा ढूंढती थी।
सब एहसास में लिखती थी पन्नों पर।
लोग समझे कविताएं लिखती है।
एक तेरी आश में पन्ने भिगोए जाती थीं।