न पूछना मुझसें सनम, की प्यार मैंनें क्यों किया दिल तेरा मुझे ना मिला, तो दिल तुझे ये क्यों दिया
यह दिल का मामला है, दिल ही जानता है
पूछो ना उस खुदा से, जो दिल को मानता है तकदीर का यह खेल है, जिसे जानता कोई नहीं,
ना जब तक कोई नाकाम हो,हार मानता कोई नहीं
नाकामियों का सबक ही, तकदीर को बनाता है
लगन सच्ची हो अगर, जो चाहे वही मिल जाता है
यह सबक आज मुझको मिला, मुझे बदलनी अपनी तकदीर है
इस हाथ में लिखनी सनम, तेरे मिलन की लकीर है