रात की गहराइयों में, एक छोटे से गाँव में एक चमकती हुई तारों की रौशनी से जगमगाते गरीब घर के छत पर एक छोटा सा बालक खड़ा था। उसकी आँखों में एक सपना था - अपने माता-पिता के लिए एक सुखद जीवन बनाना। वो तारों को देखते हुए सोचता था कि उनकी ताकत भी कम नहीं है, बस उसको विश्वास चाहिए।
रोज़ाना सुबह उठकर वह अपनी मेहनती माता-पिता की मदद करता, विद्या में लगता, और सपने की ओर कदम बढ़ता। वक़्त बीतता गया, लेकिन उसका सपना नहीं थमा।
एक दिन, उसकी मेहनत और आत्मविश्वास ने उसे सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उसने अपने गाँव के लिए शिक्षा केंद्र स्थापित किया और गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने लगा।
वो बालक जिसने तारों में अपने सपने देखे थे, आज खुद एक तार बन गया था - जो दूसरों की जिन्दगी में रौशनी डालने के लिए उजागर हो रहा था।
---कार्तिक Arya