मैं चमकता सूरज नहीं
पर चमक लिये तो हूँ,
मैं चमकता चंद्र नहीं
पर स्पष्ट दिखता तो हूँ,
मैं बहती नदी सा नहीं
पर बहाव तो हूँ,
मैं पहाड़ सा नहीं
पर अडिग तो हूँ,
मैं वृक्ष सा नहीं
पर फलदार तो हूँ,
मैं फूल सा नहीं
पर खुशबूदार तो हूँ।
**महेश रौतेला
१२.०८.२०१७