नमस्ते दोस्तो,
अगर मै आपसे पुछु की क्या आप सब ने सुबह उठ कर नाश्ता तो किया है? तो आप सब कहेंगे का किया है। मैं पूछूं की क्या किया है? तो सब लोग अपने अपने तरीके से जवाब देंगे। उत्तर भारत के लोग कहेंगे हमने छोले पूरी, पराठा ये सब खाया है। दक्षिण भारत के लोग कहेंगे हमने इडली सांभर, डोसा ये सब खाया है। पर आज मैं बताऊंगा की हमारे गुजरात के सुरत में कैसा खाना है।
नमस्ते दोस्तो, मै श्रेयश आज आपको हमारे गुजरात के खाने के बारे मैं बताऊंगा। मैं गुजरात के सुरत शहर से हूं। हमारे यह सुरत शहर के बारे मैं एक बात कही जाती है।
સુરતનુ જમણ અને કાશીનું મરણ "
इसका मतलब है कि सुरत में खाना और काशी मै मरना आपकी आत्मा के लिए सबसे अच्छा है। हमारे सुरत मै खाने की इतनी सारी वस्तुएं हैं की आप बात मत पूछो, बस खाते रहो। सुबह सुबह खमन, इदडा, खांडवी, कचोरी, फाफड़ा, जलेबी, थेपला, ढोकला और सुरत शहर का प्रख्यात सुरती लोचो। और अगर दिन में कभी भूख लगी तो उसके लिए आलूपुरी, पफ, खाउसा, सेव उसल, वड़ापाव, दाबेली, चाइनीज खाना और भी कही वानगी है। रात को खाने के बाद कुछ मीठा खाना तो बनता है। सुरत मै कही प्रख्यात जगह है जहां पर आप कुछ मीठा खा कर जैसे कि फालूदा, कोको वगेरा वगेरा, अपना दिन एकदम बढ़िया तरीके से समाप्त के सकते है।
अगर मै सुरत के अलावा बाकी गुजरात की बात करू तो गुजरात मै बहुत सारे जिले की कोई न कोई प्रख्यात वानगी रहती है। जैसे सुरत की बात करू तो सुरत की घारी, बड़ौदा का लीला चिवड़ा, राजकोट की हरी चटनी, अहमदाबाद का दालवड़ा, सौराष्ट्र के गठिया, कच्छ की दाबेली, बारडोली का सुका पतारा, वलसाड का उंधियू, जामनगर की कचोरी, भरूच की खारी सिंग और पोरबंदर की खाजली. ऐसे गिनने बैठे तो सूची बहुत लंबी बनेगी।
तो दोस्तो, मेरा आप सब को अनुरोध है की अगर आप गुजरात में आए, तो इनमे से कुछ ना कुछ खा कर ही जाइए। और इसी बात पर मै आपसे अलविदा लेता हूं। मिलते है फिर कभी।