पैरो पर बेड़ियां तो नही बंधी
फिर भी एक हद के बाहर नही जाना चाहा
रोक टोक को यू ही गंभीर लेकर
शायद कुछ गलत न किया
अब जब स्मृतियां और फरियाद
आपस में लड़ती है
में किसीको न्याय नही दे पाती
ना कोई निष्कर्ष निकलता
किताबो में पढ़कर कुछ पल ही सही
मन ही मन कहानी का मुख्य पात्र बन जाना
कल्पना में टहल कर प्रफुल्लित होना
यही सब मानो काफी नही क्या !!
लोग अक्सर समझ नही पाते
कुछ जिंदगी के तरीके थोड़े odd कुछ weird
हमे खुद ही चुनने पड़ते है.....
- उर्मि