वैसे तो औरतों को बहुत कम आजादी मिलती है
लेकिन सबसे दर्दनाक बात यह है कि
उन्हें "ना" बोलने कि आजादी नहीं मिलती
उन्हें सबकी "हा" में "हा" मिलानी पड़ती है
उन्हें बड़े बुजुर्गो कि हा में "हा" मिलानी पड़ती है
उन्हें मर्दों कि हा में "हा" मिलानी पड़ती है
उन्हें अपने बच्चों कि हा में "हा" मिलानी पड़ती है
और उन्हें दुनिया क्या कहेगी यह सोच कर
फिर से हा में "हा" मिलानी पड़ती है
औरतों के जिवन का सबसे बड़ा बंघन होती है यह "हा"