प्राणं देहं गेहं राज्यं स्वर्गं भोगं योगं मुक्तिम् |
भार्यामिष्टं पुत्रं मित्रं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||
प्राण, शरीर, गृह, राज्य, स्वर्ग, भोग, योग, मुक्ति, पत्नी, इष्ट, पुत्र, मित्र - इन सबमें से कुछ भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||
गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आप सभी को शुभकामनाएं
गुरुकृपा सदैव बनी रहे।
💐💐
गुरु कुम्हार सिस कुंभ है।
गढ़ी गढ़ी काढ़े खोट।
अंदर हाथ सहारी के ।
बाहर मारे चोट ।
🙏🙏🙏