जीवन तो नहीं!
सोचता बैठा कोई
हिमालय की गोद मे
चहुं ओर पहाड़ों
बहते झरनो के बीच
जीवन का अर्थ,
क्यों, कैसे और कब
तभी एक सुंदर नीली-पीली
तितली आई सुदूर क्षीतिज से
बैठ कर एक पल उसके बालों पर
फिर उड़ चली उसी क्षितीज की ओर
कहीं वो फूल तो नही
इस सोच मे पड़ गया वो
फिर शुरू हुआ वो सिलसिला
जिसे जीवन कहते है!