कुछ कहूं ना कहु ये ख्याल अकसर मुझे सताती हैँ
कभी सोचती हूं के किस्से कहूं अपने दिल ❤️की बात, इतने राज़ हैँ किसको सुनाऊँ
ये ख्याल अक्सर मुझे सताती हैँ
उसका होकर भी ना होना,
कैसे कहूं उनसे अपने हाले दिल,❤️
कितने साल गुज़र गए उनसे प्यार 😍भरी दो मिट्टी बोल सुनने को
अपनी आंशू 😭को किस किस से छुपाऊं
ये ख्याल अक्सर मुझे सताती हैँ
by
sarwat fatmi