जान -
जान को जान में रहने दीजिये
जान से अनजान मत रहिए
जान जन्नत जिंदगी को जानिए।।
जान सिर्फ सांसे धड़कन नहीं
जान जिंदगी कि हकीकत पहचान
जान प्रेम पुरस्कार जान जिंदगी
की शान रहने दीजिए।।
जान भगवान खुदा दीन ईमान कर्म धर्म एहसास अभिलाषा
अरमान कि कोख धरती आकाश
जान प्रथम अंतिम साथ रहने दीजिए।।
जान से ज्जबात जान से ज्वाला
जुनून जान जन्नत दोजख जान
जहां जमीं कि मुस्कान जान कि
जिंदगी जज्बे में बहते रहिए।।
जान सिर्फ एहसासों कि गर्मी
नहीं जान संजीदा इंसान जान
मादकता कि मधुशाला हाला जानिए।।
जान वसंत कि वाला जान में ही भाग्य भगवान का दीदार जान ही शुरमा जान ही कायर कमजोर जान को हालत में कैद मत होने
दीजिए।।
जान से जोर आजमाइस ना कीजिए जान में जीवंतता चेतना का जाम जान के नशे में झूमते
रहिए।।
जान में नशा हैं जान में नसीब
जान है तो जहां हैं जान के जोखिम जान खुशनसीब जान
जान ही प्राण जीवन विश्वास रहिए।।
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उतर प्रदेश।।