एक नारी शारीरिक,मानसिक , आर्थिक हर क्षेत्र में सक्षम और सशक्त हो सकती है पर वो भावनात्मक रूप से कठोर नहीं हो सकती ।जब वो भावनात्मक रूप से सशक्त हो जाएगी तो वो नारी नहीं रहेगी ।स्त्री और पुरुष में भेद का आधार ही यही है कि नारी भावनात्मक रूप से कमजोर पड़ जाती है, जबकि पुरुष भावनाओं में नहीं बहते, वे भावावेश में नहीं आते ।उन्हें भावनाओं का वास्ता देकर ठगा नहीं जाता पर स्त्रियां तो ठगी-सी रहती हैं ।