आज पहली बार भारत में एक ऐसी वीआईपी व्यक्ति की माता की शव यात्रा देखने को मिली जो एक आम भारतीयों के परिवार में होती है ना कोई तामझाम ना किसी प्रकार की नारेबाजी ना कोई वीआईपीओ का ताता यह यात्रा एक शालीन तरीके से बिना किसी बड़े नेता बड़ी हस्ती के पूर्ण हुई यह समाज को एक बहुत बड़ा उदाहरण है नहीं तो आज हम लोग देखते हैं कि एक छोटा सा विधायक सांसद के परिवार में भी किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो वहां भी बड़े धूमधाम से तामझाम से राजनीतिक दिखावे में लग जाते हैं लेकिन आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी ने यह दिखा दिया है कि वीआईपी भी एक आम इंसान है उसका भी एक परिवार है जिसे एक शालीनता से परिवार के साथ अपने परिवार के साथ घर के किसी भी प्रकार के प्रोग्राम को किया जा सकता है मेने मीडिया में देखा जो बता रहे थे कि न्यूज़ मीडिया को भी इस बारे में देर से खबर लगी तो सोचे कैसे हैं हमारे प्रधानमंत्री क्या आप को गर्व नहीं हे यदि प्रधानमंत्री यदि इसी श्रद्धांजलि को बड़े लेवल पर किया जाता तो अहमदाबाद के अंदर आम जनता को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता लेकिन पूरी शोक यात्रा को एक सभ्य तरीके से पूरा कर मोदी परिवार ने उन वीआईपी लोगों को उन राजनीतिक हस्तियों को एक संदेश दिया है कि आपको बिना तामझाम के भी अच्छे तरीके से अपनी मां की शव यात्रा को निकालकर दाह संस्कार कर सकते है बिना किसी सियासी ड्रामे के सिर्फ 15-20 घर- परिवार के लोंगो की उपस्थिति में प्रधानमंत्री की माताजी का अंतिम संस्कार दैखकर पूरा देश अभिभूत है!! 🙏🙏
विनम्र श्रद्धांजलि...