मन ही मन
किसी ने अपना माना, पहचाना
और फिर
दो टूक जबाब में
अपने कहने वाले
मौसम के तरह बदले है।।
रिश्ते के नाम में
एक से एक रोड़े
मिले है,
कितने अपने मौसम
के फूल बने है ।।
काश ! कोई सदाबहार होता
मौसम के अनुसार न बदलता,
जीवन के हर रंग में साथ निभाता
कोई तो ऐसा होता अपना सा जो होता ।।
न हुआ कोई अपना, तो भी अपना नही कोई बैगाना
जमाने के रंग में सारे ढले है, तो भी अपना है जमाना ।।
दिल ए अनंत में चाहत है राहत है,
अनंत कथा के कथाकार भी अनंत है।।