कविता का उजाला कर लो
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कविता कहाँ नहीं ??
हर पल में ,हर छिन में
आँसू में,मधुबन में
जीत में,हार में
मौन की पुकार में ---
यानि,हरेक लिबास में ---!!
चल ,खोज लूँ तुझे
हर श्वाँस में भर लूँ तुझे ----
अभी लोरी में आने दे
कुछ तो गुनगुनाने दे -----!!
शुभ रात्रि मित्रो
सस्नेह
डॉ प्रणव भारती