विज्ञान सम्मत पदार्थ (matter) के आशय से मेल नहीं खाता है। जबकि जैनदर्शन का पुद्गल शब्द विज्ञान के पदार्थ का पर्यायवाची है । तथा पारिभाषित होते हुए रूढ़ नहीं किन्तु व्योत्पत्तिक है-- पूरणात् पुत् गलयतीति गलपूरण-गलनान्वर्ष संजत्वात् पुद्गलाः-अर्थात् पूर्ण स्वभाव से पुत् और गलन स्वभाव से गल इन दो अवयवों के मेल से पुद्गल शब्द बना है, यानी पूरण और गलन को प्राप्त होने से पुद्गल अन्वर्थ संज्ञक है। जो वस्तु दूसरी वस्तु (द्रव्य या पर्याय) से मिलती रहे, मिले और गले, पृथक् हो इस प्रकार के गलन-मिलन स्वभाव वाली वस्तु को पुद्गल कहते हैं।