Hindi Quote in Motivational by Jay Vora

Motivational quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

Janmojanm vs Saat janam....

पिता का गोत्र पुत्री को प्राप्त नहीं होता।
विज्ञान के अनुसार स्त्री मे गुणसूत्र XX और पुरूष मे xy होते हैं।यदि स्त्री के X गुण सूत्र पुरुष के X गुणसूत्र से संयोग करे तो पुत्री और यदि पुरूष के y गुण सूत्र से संयोग करे तो पुत्र उत्पन्न होता है।अर्थात् पुत्री या पुत्र का होना पुरूष पर निर्भर है स्त्री पर नहीं।
जब XX अर्थात् पुत्री गुणसूत्र मे एक माता का और एक पिता का आता है यह संयोग एक गांठ की रचना करता है जिसे cross over कहते हैं।और xy गुण सूत्र मे अर्थात् पुत्र मे y गुण सूत्र केवल पिता से ही आता है क्योंकि माता मे यह नहीं है तथा दोनों असमान होने से पूर्ण cross over नहीं होता, केवल5% तक होता है और 95% ऐसे ही रहता है।इसलिए महत्वपूर्ण y गुणसूत्र है और यह निश्चित ही पिता से आया है।बस इसी y गुणसूत्र का सम्बंध गोत्र से है। चूंकि y गुणसूत्र स्त्रियों मे नहीं होता इसलिए विवाह के पश्चात स्त्रियों को उनके पतियों का गोत्र दिया जाता है।वैदिक संस्कृति मे एक ही गोत्र मे विवाह नहीं होता क्योंकि सगोत्र होने से वे बहिन भाई होते है उनके पूर्वज एक ही थे।और आनुवांशिक विज्ञान के अनुसार यदि समान गुण धर्म वाले दो व्यक्तियों का विवाह हो तो संतान विकृत होगी।ऐसे दम्पति की संतान मे कोई नयापन न होने से रचनात्मकता का अभाव होता है।ऐसी सन्तान मे अनुवांशिक दोष मानसिक विकलांगता,अपंगता आदि रोग आते है. इसिलिए शास्त्रों मे सगोत्र विवाह निषिद्ध है।इस गोत्र का संवाहक यानी उत्तराधिकार पुत्री को एक पिता न कर दे इसलिए विवाह से पहले कन्या दान कराया जाता है अर्थात् गोत्र मुक्त कन्या का पाणिग्रहण कर भावी वर अपने गोत्र मे उस कन्या को स्थान देता है।अब यदि पुत्र है तो 95% पिता और 5% माता।और यदि पुत्री है तो 50% माता और 50% पिता का सम्मिलन है।फिर यदि पुत्री की पुत्री हुई तो यह dna 50% का आधा अर्थात् 25% रह जायेगा।और यदि फिर पुत्री हो तो फिर आधा रह जायेगा।इस प्रकार छः पीढी तक यह 1% रह जायेगा।अर्थात् सातवीं पीढी मे न के बराबर होगा इसीलिए माता की छः पीढी मे विवाह निषेध है।एक बात और माता पिता कन्यादान करते हैं तो इसका अर्थ यह नहीं कि कन्या कोई वस्तु है बल्कि यह है कि दूसरे की कुलवधु बनने के लिए उसे गोत्र मुक्त होना चाहिए।dna मुक्त तो नहीं हो सकती क्योंकि भौतिक शरीर मे वे dna बने रहते हैं, इसलिए माता का रिश्ता बना रहता है केवल पिता के गोत्र का त्याग किया जाता है तभी वह भावी वर को वह वचन देती है कि वह उसके कुल की र्मयादा का पालन करेगी।अर्थात् उसके गोत्र व dna को करप्ट नहीं करेगी।वर्णशंकर नहीं करेगी।इसीलिए मनु महाराज ने कहा है कि विवाह माता की छः पीढी और पिता के गोत्र मे नहीं करना चाहिए।

Hindi Motivational by Jay Vora : 111819965
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now